रविवार, 12 अगस्त 2012

छिद्रान्वेषण ......यह बिजिनेस मेनेजमेंट है.... डा श्याम गुप्त ....


                                    
                              आज  कल घर घर में एम् बी ए  के  स्कूल खुल रहे हैं और हर व्यक्ति मेनेजर बनने का ख्वाव देखता है .... सफाई प्रवंधन मेनेजर ही क्यों न हो .... मेनेजमेंट का ज़माना है ...छोले-पकौड़ी या कपडे , जूते, कुर्सी-मेज बेचने वाला हो या घर-घर पर  साबुन-सर्फ़ ...सब मेनेजर हैं | यह मेनेजमेंट है क्या .... किसी भी भांति से अपना सामान बेचना......देखिये ...चित्र में...
१---कीमत --४००००/-( और बेईमानी की इंतिहा है कीमत ..३९९९९ /- लिखना ..क्या हम इतने मूर्ख हैं ?)  जिसकी कीमत १०००० /- से अधिक् नहीं होगी ....फ्री में १४००० के आइटम ..जिनकी कीमत ४००० /- से अधिक नहीं होगी .....अर्थात १४००० का माल ४००००/- में |
२-- कीमत --३२०००/-( ३१९९९/-/)  जो १००००/- से अधिक की नहीं है ...फ्री में २१०००/- का आइटम जो ६००० /- से अधिक का नहीं होगा ....अर्थात ....आप  ही सोचें ...क्यों  बिजेंनेस-में वारे-न्यारे होते हैं.... कहाँ  से , कैसे कालाधन पैदा होता है ......यह बाजारवाद है...बाज़ार का धर्म....

--- क्या सिखा रहे हैं हम अपने नौनिहालों को ..शुरू से ही .झूठ, बेईमानी , टेक्स चोरी ..स्कूल-कालेजों से ही ...वे बड़े होकर क्या करेंगे .....
---- ऐसे  समाज, सरकार, वर्ग  से हम क्या आशा करें .....और क्यों करें ....
.................................................................. मस्त राम मस्ती में , आग लगे बस्ती  में ...........


झूठा  विज्ञापन करें , सबसे अच्छा माल |
देकर गिफ्ट, इनाम बस, ग्राहक करें हलाल |

झूठ काम की लूट है, लूट सके तो लूट |
तू पीछे रह जाय क्यों, सभी पड़े हैं टूट |

तेल-पाउडर बेचते, झूठ बोल इतरायं |
बड़े  महानायक बने, मिलें लोग हरषायं |

साबुन क्रीम औ तेल को, बेच रहीं इतराय |
झूठे  विज्ञापन करें , हीरोइन कहलायं |

2 टिप्‍पणियां:

  1. जो शिक्षा चोरी, झूठ बोलना, और कपट सिखाती हो .... सीधा सा अर्थ है ऎसी शिक्षा 'देशद्रोहियों की फसल' पैदा कर रही है.

    कभी व्यवसायियों का एक स्लोगन था 'ग्राहक मेरा भगवान् है और मैं उसका पुजारी.'

    आज के एक एम् बी ए किये हुए सेलर से जब बात की तो उसने बताया कि हमारा स्लोगन है 'जिसे नहीं भी चाहिए उसे भी बेच दो तो आप काबिल (बिजनेसमेन) हैं.'

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    1. सही कहा प्रतुल जी ....आजकल कोर्पोरेट कल्चर द्वारा भगवान को भी बेचा जारहा है.....और कुप्रचार में सिर्फ भारतीयों को कोसा जाता है...कहा जाता है कि भारत में भगवान के नाम पर धंधा होता है.....

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